दिवाली गिफ्ट पर टैक्स 2026: ₹15,000 और ₹50,000 के नियम समझें

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गिफ्ट बॉक्स और रुपये के निशान वाला ग्राफिक, दिवाली गिफ्ट पर टैक्स के ₹15,000 और ₹50,000 नियम

दिवाली पर मिठाई के डिब्बे से लेकर सोने के सिक्के और गिफ्ट वाउचर तक, तोहफों की बरसात होती है, लेकिन हर दिवाली गिफ्ट टैक्स-फ्री नहीं होता। 1 अप्रैल 2026 से लागू नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 और इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत रिश्तेदारों, दोस्तों और कंपनी से मिले गिफ्ट के अलग-अलग नियम हैं, और ऑफिस गिफ्ट की टैक्स-फ्री लिमिट अब ₹5,000 से बढ़कर ₹15,000 सालाना हो गई है।

यानी इस बार ऑफिस वाले हैंपर पर थोड़ी ज़्यादा राहत है, पर दोस्तों से मिले महंगे तोहफे गलत हिसाब में फंसा सकते हैं। नीचे पूरा हिसाब आसान भाषा में।

मुख्य बातें

  • माता-पिता, भाई-बहन, पति/पत्नी जैसे तय रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट किसी भी रकम का हो, टैक्स-फ्री है।
  • दोस्तों या गैर-रिश्तेदारों से साल भर में कुल ₹50,000 से ज़्यादा के गिफ्ट हुए तो पूरी रकम पर टैक्स लगता है।
  • कंपनी से मिले हैंपर, वाउचर जैसे गिफ्ट की टैक्स-फ्री सीमा अब ₹15,000 सालाना है; कैश बोनस पूरी तरह सैलरी माना जाता है।
  • एक व्यक्ति से एक दिन या एक मौके पर ₹2 लाख या उससे ज़्यादा कैश लेना नियम के खिलाफ है, रिश्तेदार हों तब भी।

रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट: कोई लिमिट नहीं

टैक्स कानून में “रिश्तेदार” की एक तय लिस्ट है। इसमें आपके पति/पत्नी, आपके और आपके जीवनसाथी के भाई-बहन, माता-पिता के भाई-बहन (चाचा, बुआ, मामा, मौसी), दादा-दादी, नाना-नानी, बच्चे-पोते, और इन सबके पति/पत्नी आते हैं। इनसे मिला कैश, सोना, शेयर या प्रॉपर्टी, कितनी भी कीमत की हो, उस पर गिफ्ट के तौर पर टैक्स नहीं लगता।

ध्यान दें, कज़िन (चचेरे-ममेरे भाई-बहन), भतीजे-भांजे और दोस्त इस लिस्ट में नहीं हैं। इनसे मिला गिफ्ट अगले नियम में गिना जाएगा। इसके अलावा अपनी शादी पर मिले गिफ्ट और वसीयत या विरासत में मिली चीज़ें भी टैक्स-फ्री रहती हैं।

दोस्तों से गिफ्ट: ₹50,000 का “पूरा या कुछ नहीं” नियम

गैर-रिश्तेदारों से साल भर (1 अप्रैल से 31 मार्च) में मिले सभी गिफ्ट जोड़े जाते हैं। कुल रकम ₹50,000 तक है तो कोई टैक्स नहीं। लेकिन जैसे ही यह ₹50,000 पार हुई, सिर्फ ऊपर की रकम नहीं, बल्कि पूरी रकम आपकी इनकम में जुड़ जाती है और स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।

आसान हिसाब: मान लीजिए एक दोस्त ने ₹28,000 की स्मार्टवॉच दी और दूसरे ने ₹20,000 का सोने का सिक्का। कुल ₹48,000, यानी टैक्स शून्य। अब किसी तीसरे ने ₹5,000 का गिफ्ट कार्ड भी दे दिया, तो कुल ₹53,000 हो गया। अगर आप 20% वाले स्लैब में हैं, तो इन ₹53,000 पर करीब ₹10,600 टैक्स और 4% सेस मिलाकर लगभग ₹11,000 देने पड़ सकते हैं। सिर्फ ₹5,000 के एक तोहफे ने पूरा हिसाब बदल दिया।

सोना, शेयर जैसी चीज़ों की कीमत मिलने के दिन के मार्केट रेट से गिनी जाती है, और प्रॉपर्टी की स्टांप ड्यूटी वैल्यू से।

ऑफिस से मिला हैंपर और बोनस: नई ₹15,000 लिमिट

कंपनी की तरफ से मिलने वाले गिफ्ट, जैसे मिठाई-ड्राई फ्रूट हैंपर, ई-गिफ्ट कार्ड, वाउचर या कोई गैजेट, “परक्विज़िट” यानी सैलरी के अलावा मिलने वाला फायदा माने जाते हैं। पुराने नियमों में यह छूट सिर्फ ₹5,000 तक थी, जो इनकम टैक्स रूल्स 2026 में बढ़ाकर ₹15,000 सालाना कर दी गई है। इसमें दिवाली के साथ-साथ जन्मदिन या सालगिरह पर मिले गिफ्ट भी जुड़ते हैं।

उदाहरण के लिए, ₹10,000 का दिवाली वाउचर और ₹6,000 का बर्थडे गिफ्ट मिलाकर ₹16,000 हो जाता है, जो सीमा से बाहर है। ऐसे में टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक पूरी रकम टैक्सेबल हो सकती है, इसलिए HR से साल भर के गिफ्ट का हिसाब पूछना समझदारी है।

कैश या बैंक ट्रांसफर से मिला दिवाली बोनस किसी भी रकम का हो, सीधे सैलरी में जुड़ता है और उस पर TDS कट सकता है। नई टैक्स व्यवस्था में जिनकी सैलरी ₹12.75 लाख (स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलाकर) वाली टैक्स-फ्री सीमा के आसपास है, उनके लिए बोनस से टैक्स का बोझ अचानक बढ़ सकता है, इसलिए सैलरी स्लिप ज़रूर देखें।

कैश गिफ्ट और बिज़नेस गिफ्ट के नियम

नए एक्ट की धारा 186 (पहले 269ST) के मुताबिक किसी एक व्यक्ति से एक दिन में, एक ट्रांज़ैक्शन में या एक मौके पर ₹2 लाख या उससे ज़्यादा कैश लेना मना है। इस पर पेनल्टी लेने वाले पर लगती है और यह मिली रकम के बराबर हो सकती है। रिश्तेदारों के लिए भी इसमें छूट नहीं है, इसलिए बड़ी रकम हो तो बैंक ट्रांसफर या चेक बेहतर है।

अगर आप दुकानदार या कारोबारी हैं और किसी डीलर-क्लाइंट को साल भर में ₹20,000 से ज़्यादा के गिफ्ट देते हैं, तो उस पर 10% TDS काटने का नियम है (पहले धारा 194R, अब धारा 393)। गिफ्ट पर दिया GST वापस (ITC) नहीं मिलता, यह भी ध्यान रखें।

आपके लिए इसका मतलब

ज़्यादातर परिवारों के लिए घबराने की बात नहीं है, क्योंकि आम दिवाली गिफ्ट न तो ₹50,000 पार करते हैं और न ही परिवार वालों से मिले तोहफों पर टैक्स है। दिक्कत तब आती है जब दोस्तों या बिज़नेस से महंगे गिफ्ट मिलें। सबसे आसान आदत: ₹10,000 से ऊपर के हर गिफ्ट को एक नोट या एक्सेल में लिख लें, किसने दिया और कीमत क्या थी। ITR भरते वक्त यही लिस्ट काम आएगी। अपने टैक्स केस के लिए किसी CA से सलाह ज़रूर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या माता-पिता से मिले ₹1 लाख के गिफ्ट पर टैक्स लगेगा?

नहीं, माता-पिता तय रिश्तेदारों की लिस्ट में हैं। हां, ₹2 लाख या उससे ज़्यादा कैश एक साथ न लें, बैंक ट्रांसफर बेहतर है। उस पैसे से होने वाली कमाई (जैसे FD ब्याज) पर आपको सामान्य टैक्स देना होगा।

कंपनी से ₹15,000 का गिफ्ट मिला तो क्या टैक्स लगेगा?

₹15,000 नई सालाना सीमा है। सीमा के ठीक बराबर रकम को लेकर एक्सपर्ट्स की राय अलग-अलग है, इसलिए अपनी कंपनी के HR या फॉर्म 16 में परक्विज़िट वाला हिस्सा देख लें।

दोस्त से गिफ्ट में मिले सोने पर टैक्स कैसे गिना जाएगा?

सोने की कीमत गिफ्ट मिलने के दिन के मार्केट रेट से गिनी जाती है और बाकी गैर-रिश्तेदारों के गिफ्ट के साथ जोड़ी जाती है। कुल ₹50,000 पार हुआ तो पूरी रकम इनकम में जुड़ेगी।

(नोट: ये खबर सिर्फ जानकारी के लिए है, इसे निवेश की सलाह न समझें।)

स्रोत: StudyCafe, CA Akhilesh, Vittmarg

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