दिवाली पर पटाखे से जलने की स्थिति में सबसे पहला और सबसे असरदार इलाज है, जले हिस्से को तुरंत 10 से 20 मिनट तक बहते सादे पानी के नीचे रखना। डॉक्टरों के मुताबिक लोग सबसे बड़ी गलती टूथपेस्ट, मक्खन या बर्फ लगाकर करते हैं, जिससे घाव और बिगड़ सकता है।
मुख्य बातें
- जले हिस्से को कम से कम 10-15 मिनट, हो सके तो 20 मिनट तक नल के बहते पानी में रखें।
- टूथपेस्ट, मक्खन, बर्फ, आटा या कोई घरेलू नुस्खा न लगाएं, छाले न फोड़ें।
- आंख में चिंगारी जाए तो रगड़ें नहीं, साफ पानी से 10-15 मिनट धोकर सीधे अस्पताल जाएं।
- चेहरा, हाथ, गुप्तांग या बड़ा हिस्सा जले तो देर किए बिना डॉक्टर के पास जाएं।
जलने पर पहले 20 मिनट: स्टेप बाय स्टेप
- आग से दूर करें: कपड़ों में आग लगे तो भागें नहीं। “रुको, लेटो और लुढ़को” (Stop, Drop, Roll) करें, या मोटे कंबल, रेत या पानी से आग बुझाएं।
- पानी से ठंडा करें: जले हिस्से को नल के बहते, सामान्य तापमान वाले पानी में 10 से 20 मिनट रखें। इससे जलन और सूजन दोनों कम होती हैं।
- ढकें: ठंडा करने के बाद साफ सूती कपड़े या स्टेराइल गॉज़ से हल्का ढक दें, कसकर पट्टी न बांधें।
एक बात का खास ध्यान रखें, 20 मिनट लगातार बहता पानी सुनने में ज़्यादा लगता है, लेकिन यही असली फर्स्ट एड है। दो-तीन मिनट पानी डालकर क्रीम लगा देना काफी नहीं।
घरेलू नुस्खे जो नुकसान करते हैं
दादी-नानी के ज़माने से चले आ रहे कई नुस्खे जले पर उल्टा असर करते हैं। टूथपेस्ट और मक्खन जैसी चीज़ें फायदे की बजाय नुकसान कर सकती हैं, इसलिए इमरजेंसी डॉक्टर इन्हें लगाने से साफ मना करते हैं। बर्फ सीधे लगाने से नाज़ुक त्वचा को और चोट पहुंच सकती है। छाले शरीर की अपनी सुरक्षा परत हैं, उन्हें फोड़ने से घाव खुल जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक छोटी जलन को भी नज़रअंदाज़ करने पर इंफेक्शन और निशान रह सकता है।
आंख में चिंगारी या बारूद चला जाए तो
आंख को बिल्कुल न रगड़ें। पलकें हल्के हाथ से खोलकर साफ नल के पानी से कम से कम 10-15 मिनट धोएं। गुलाब जल, दूध या कोई भी घरेलू घोल न डालें। केमिस्ट से खुद खरीदकर आई ड्रॉप, खासकर स्टेरॉयड वाले, न डालें, क्योंकि आई स्पेशलिस्ट्स के मुताबिक ये जलन या इंफेक्शन बढ़ा सकते हैं। धोने के बाद आंख को साफ कपड़े से हल्का ढकें और सीधे अस्पताल जाएं।
धुएं से सांस फूले तो
व्यक्ति को तुरंत धुएं से दूर, खुली हवादार जगह पर ले जाएं। देखें कि वह होश में है और ठीक से सांस ले रहा है। मुंह कुल्ला करवाने के लिए पानी दें। अस्थमा या COPD के मरीज़ अपना इनहेलर पास रखें और डॉक्टर के बताए मुताबिक इस्तेमाल करें। खांसी या सांस की तकलीफ बढ़ती जाए तो घर पर नेबुलाइज़र के भरोसे इंतज़ार न करें, अस्पताल जाएं।
आपके लिए इसका मतलब: पटाखे जलाने से पहले की तैयारी
- पास में पानी से भरी बाल्टी और रेत रखें, बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें।
- सूती और शरीर से सटे कपड़े पहनें, सिंथेटिक, ढीले दुपट्टे या लहराते कपड़ों से बचें।
- जो पटाखा न चले, उसके पास दोबारा झुककर न देखें। अस्पतालों में चेहरे और आंख की कई चोटें पटाखे के बहुत करीब जाने से आती हैं।
- घर का फर्स्ट एड बॉक्स पहले से चेक कर लें और नज़दीकी अस्पताल की इमरजेंसी का नंबर फोन में सेव रखें।
Tazanews की राय: त्योहार का मज़ा तभी है जब रात अस्पताल की इमरजेंसी में न बीते। फर्स्ट एड का मकसद सिर्फ शुरुआती नुकसान कम करना है, यह इलाज की जगह नहीं ले सकता। जलन गहरी लगे, छाले बड़े हों या दर्द कम न हो, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पटाखे से जलने पर तुरंत क्या लगाएं?
सबसे पहले कुछ भी लगाने की बजाय 10 से 20 मिनट बहता सादा पानी डालें। उसके बाद साफ कपड़े से ढकें। कोई क्रीम या दवा डॉक्टर की सलाह से ही लगाएं।
क्या जले पर बर्फ लगाना सही है?
नहीं। डॉक्टर बर्फ सीधे लगाने से मना करते हैं। ठंडा करने के लिए सामान्य बहता पानी ही सबसे सुरक्षित है।
जलने पर अस्पताल कब जाना ज़रूरी है?
जब जलन गहरी हो, बड़ा हिस्सा जला हो, सूजन बढ़े, या चेहरा, आंख, हाथ या गुप्तांग प्रभावित हों। बच्चों और बुज़ुर्गों के मामले में छोटी जलन पर भी डॉक्टर को दिखाएं।
(नोट: यह खबर सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी चोट या जलन की स्थिति में डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।)
स्रोत: Business Standard, ETV Bharat




