नवंबर 2026 का आसमान स्काईवॉचर्स के लिए खास रहने वाला है। 24 नवंबर को इस साल का एक सुपरमून दिखेगा, बीच महीने में Leonids उल्कापात होगा और सुबह-सुबह मंगल और बृहस्पति एक-दूसरे के बेहद करीब नज़र आएंगे। अच्छी बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर नज़ारे आप बिना टेलीस्कोप के, सिर्फ अपनी छत से देख सकते हैं।
मुख्य बातें
- 24 नवंबर: सुपरमून, पूर्णिमा का पीक भारतीय समय के मुताबिक रात करीब 8:23 बजे
- 17-18 नवंबर की रात: Leonids उल्कापात का पीक, घंटे में करीब 10-15 टूटते तारे
- 14-16 नवंबर: सूर्योदय से पहले मंगल और बृहस्पति की करीबी जोड़ी
- Taurids उल्कापात के दो छोटे पीक: 4-5 और 11-12 नवंबर
24 नवंबर का सुपरमून: भारत में कब और कैसे देखें
नवंबर की पूर्णिमा, जिसे पश्चिमी देशों में Beaver Moon कहा जाता है, इस बार सुपरमून होगी। चांद 24 नवंबर को 14:53 UTC पर पूरा होगा, यानी भारत में रात करीब 8:23 बजे। इसका मतलब है कि भारत में उस वक्त चांद आसमान में उग चुका होगा, जो हमारे लिए बढ़िया मौका है। वैसे 23 से 25 नवंबर तक चांद लगभग पूरा ही दिखेगा।
उस दिन चांद धरती से करीब 3,60,770 किलोमीटर दूर होगा। चांद की औसत दूरी लगभग 3,84,400 किलोमीटर मानी जाती है। सीधा हिसाब लगाएं तो चांद करीब 23,600 किमी पास होगा, जिससे वह आम पूर्णिमा से लगभग 6% बड़ा और 12-13% ज़्यादा चमकदार दिख सकता है। सच यह भी है कि इतना फर्क नंगी आंखों से पकड़ना मुश्किल है, पर उगते वक्त क्षितिज के पास चांद हमेशा कुछ ज़्यादा बड़ा लगता है।
उस रात चांद कृतिका (Pleiades) तारा-समूह के पास रहेगा। और अगर यह मौका छूट जाए तो चिंता नहीं, क्योंकि अगला सुपरमून दिसंबर में भी आने वाला है।
Leonids और Taurids: टूटते तारे देखने का मौका
Leonids उल्कापात पूरे महीने सक्रिय रहता है, लेकिन इसका पीक 17 नवंबर की रात से 18 नवंबर की सुबह तक रहेगा। अंधेरी जगह से घंटे में करीब 10 से 15 उल्काएं दिख सकती हैं। ये उल्काएं सिंह (Leo) राशि की दिशा से आती दिखती हैं, इसीलिए इनका नाम Leonids पड़ा। इतिहास में 1966 जैसे साल भी रहे हैं, जब इसने उल्काओं का तूफान ला दिया था।
इस बार किस्मत भी साथ दे रही है। 17 नवंबर को चांद अपने फर्स्ट क्वार्टर फेज़ में होगा, जो आमतौर पर आधी रात के आसपास डूब जाता है। यानी सुबह के 2 से 5 बजे के बीच आसमान अंधेरा रहेगा और टूटते तारे बेहतर दिखेंगे।
इससे पहले Taurids उल्कापात के दो हल्के पीक आएंगे, Southern Taurids 4-5 नवंबर की रात और Northern Taurids 11-12 नवंबर को। इनमें उल्काएं कम होती हैं, लेकिन कभी-कभी काफी चमकदार “फायरबॉल” भी दिख जाते हैं।
सुबह का नज़ारा: मंगल और बृहस्पति की जोड़ी
पूरे नवंबर में मंगल और बृहस्पति सुबह के आसमान में धीरे-धीरे करीब आते दिखेंगे। अलग-अलग स्रोतों के मुताबिक दोनों 14 से 16 नवंबर के बीच सबसे पास होंगे। सूर्योदय से पहले पूर्व दिशा में देखें, तो दो चमकदार “तारे” पास-पास दिखेंगे। जो ज़्यादा चमकदार और सफेद है वह बृहस्पति है, और हल्का लाल-नारंगी मंगल। पास में सिंह राशि का चमकदार तारा Regulus (मघा) भी होगा।
इसी दौरान सुबह के आसमान में शुक्र भी नीचे दक्षिण-पूर्व में चमक रहा होगा। एक ज़रूरी बात: सूरज निकलते ही देखना बंद कर दें और कभी भी दूरबीन या बाइनोकुलर से सूरज की तरफ न देखें।
आपके लिए इसका मतलब: घर से कैसे देखें
- अंधेरी जगह चुनें: स्ट्रीट लाइट से दूर छत या खुला मैदान सबसे अच्छा है। सुपरमून शहर से भी आसानी से दिखेगा, लेकिन उल्कापात के लिए अंधेरा ज़रूरी है।
- आंखों को 20 मिनट दें: मोबाइल की स्क्रीन बार-बार न देखें, वरना आंखें अंधेरे की आदी नहीं हो पाएंगी।
- प्रदूषण का असर: उत्तर भारत में इन दिनों धुंध और स्मॉग रहता है, जिससे हल्की उल्काएं छिप जाती हैं। शहर से बाहर जाना संभव हो तो नज़ारा कहीं बेहतर दिखेगा।
- बाइनोकुलर काम आएगा: चांद के गड्ढे और कृतिका के तारे साधारण बाइनोकुलर से भी साफ दिखते हैं। उल्कापात के लिए इसकी ज़रूरत नहीं, उसे खुली आंखों से ही देखें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नवंबर 2026 में सुपरमून कब है?
सुपरमून 24 नवंबर 2026 को है। भारत में पूर्णिमा का पीक रात करीब 8:23 बजे होगा।
क्या Leonids उल्कापात भारत से दिखेगा?
हां, 17-18 नवंबर की रात आधी रात के बाद से सुबह तक अंधेरी जगह से देखना सबसे अच्छा रहेगा।
क्या सुपरमून देखने के लिए टेलीस्कोप चाहिए?
नहीं, सुपरमून और उल्कापात दोनों खुली आंखों से देखे जा सकते हैं। बाइनोकुलर से चांद की सतह ज़्यादा साफ दिखती है।
स्रोत: The Weather Network, Popular Science, Star Walk




