NASA का Voyager 1 इसी महीने एक ऐसी दूरी छूने जा रहा है, जहां तक इंसान का बनाया कोई भी यान आज तक नहीं पहुंचा। NASA के मुताबिक 18 नवंबर 2026 को Voyager 1 धरती से “एक प्रकाश-दिन” दूर होगा, यानी वहां से भेजा गया रेडियो सिग्नल हम तक पहुंचने में पूरे 24 घंटे लेगा। 1977 में लॉन्च हुआ यह यान 49 साल से लगातार सफर में है।
मुख्य बातें
- EarthSky की गणना के मुताबिक यह पड़ाव 18 नवंबर को भारतीय समय से करीब सुबह 11:46 बजे आएगा।
- उस वक्त दूरी होगी लगभग 25.9 अरब किमी, यानी करीब 2,590 करोड़ किलोमीटर।
- यान करीब 11 मील (लगभग 17.7 किमी) प्रति सेकंड की रफ्तार से आगे बढ़ रहा है।
- बिजली घटने की वजह से इसके ज़्यादातर वैज्ञानिक उपकरण बंद किए जा चुके हैं।
‘एक प्रकाश-दिन’ का मतलब क्या है?
प्रकाश-वर्ष का नाम आपने सुना होगा। प्रकाश-दिन उसी का छोटा भाई है, यानी वो दूरी जो रोशनी एक दिन में तय करती है। रोशनी एक सेकंड में करीब 3 लाख किलोमीटर चलती है और एक दिन में 86,400 सेकंड होते हैं।
सीधा हिसाब लगाएं तो 3 लाख × 86,400 = लगभग 2,590 करोड़ किलोमीटर। यही आंकड़ा NASA और EarthSky बता रहे हैं। तुलना के लिए, सूरज की रोशनी धरती तक करीब 8 मिनट में पहुंच जाती है, जबकि Voyager 1 से आने वाला सिग्नल अब पूरा एक दिन लेगा।
मतलब ये कि अगर इंजीनियर आज सुबह यान को कोई कमांड भेजें, तो उसका जवाब उन्हें अगले से अगले दिन की सुबह ही मिलेगा, क्योंकि जाने और लौटने दोनों में एक-एक दिन लगेगा।
49 साल का सफर: 1977 से अब तक
Voyager 1 को 5 सितंबर 1977 को लॉन्च किया गया था। उस वक्त बाहरी ग्रहों की एक खास सीध बनी थी, जो NASA के मुताबिक करीब 175 साल में एक बार आती है। इसी का फायदा उठाकर Voyager यानों ने गुरु और शनि जैसे बड़े ग्रहों के पास से गुज़रते हुए अपनी रफ्तार बढ़ाई।
अगस्त 2012 में Voyager 1 ने हेलियोपॉज़ पार किया, यानी वो सीमा जहां सूरज से निकलने वाली हवा का असर खत्म होता है। इसके बाद यह तारों के बीच वाले अंतरिक्ष में पहुंचने वाला पहला इंसानी यान बना। इसी यान ने धरती की मशहूर “पेल ब्लू डॉट” तस्वीर भी ली थी, जिसमें हमारी धरती बस एक छोटे से नीले बिंदु जैसी दिखती है।
अभी किस हाल में है Voyager 1?
यान को बिजली तीन रेडियोआइसोटोप थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर (RTG) से मिलती है, जिनकी ताकत हर साल थोड़ी घटती जाती है। बिजली बचाने के लिए NASA एक-एक करके सिस्टम बंद कर रहा है। EarthSky के मुताबिक अप्रैल 2026 में Low-Energy Charged Particle (LECP) उपकरण भी बंद किया गया, जिसे ज़रूरत पड़ने पर दोबारा चालू किया जा सकता है।
Popular Science की रिपोर्ट के मुताबिक RTG की बिजली 2030 के दशक में किसी समय खत्म हो जाएगी, और उसके बाद यान से संपर्क टूट जाएगा। यानी “एक प्रकाश-दिन” वाला यह पड़ाव शायद इसकी आखिरी बड़ी उपलब्धियों में से एक होगा।
एक बात और: तारीख को लेकर रिपोर्ट्स में थोड़ा फर्क है। कुछ जगह 15 नवंबर लिखा गया है, जबकि NASA और EarthSky 18 नवंबर बता रहे हैं। ये फर्क इसलिए भी आता है क्योंकि धरती खुद सूरज के चारों ओर घूमती है, तो धरती से यान की दूरी थोड़ी ऊपर-नीचे होती रहती है।
Tazanews की राय: क्यों मायने रखता है ये पड़ाव
ये कोई नया मिशन या खोज नहीं है, फिर भी इसकी अहमियत बड़ी है। 1970 के दशक की तकनीक, जिसकी कंप्यूटर मेमोरी आज के किसी सस्ते फोन से भी बहुत कम है, आधी सदी बाद भी धरती से बात कर रही है। ये इंजीनियरिंग और लंबी योजना की मिसाल है।
छात्रों और विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए ये दूरी और समय को समझने का अच्छा मौका है। अगली बार जब कोई “प्रकाश-वर्ष” कहे, तो याद रखिए कि इंसान का सबसे दूर गया यान 49 साल में अभी सिर्फ एक “प्रकाश-दिन” तक पहुंचा है। सबसे पास वाला तारा इससे हज़ारों गुना दूर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Voyager 1 धरती से कितनी दूर है?
18 नवंबर 2026 को यह करीब 25.9 अरब किलोमीटर (लगभग 16.1 अरब मील) दूर होगा, जो एक प्रकाश-दिन के बराबर है।
क्या Voyager 1 अब भी काम कर रहा है?
हां, NASA अब भी इससे संपर्क में है, लेकिन बिजली बचाने के लिए ज़्यादातर उपकरण बंद किए जा चुके हैं।
Voyager 1 से संपर्क कब तक रहेगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके RTG की बिजली 2030 के दशक में खत्म हो जाएगी, उसके बाद संपर्क खत्म हो जाएगा।
स्रोत: NASA Science, EarthSky, Popular Science




