NASA का Swift Observatory करीब 22 साल अंतरिक्ष में काम करने के बाद बुधवार, 4 नवंबर को धरती के वायुमंडल में लौटने वाला है। NASA के मुताबिक इसका ज़्यादातर हिस्सा हवा से रगड़ खाकर जल जाएगा, लेकिन कुछ टुकड़े ज़मीन या समुद्र तक पहुंच सकते हैं, और किसी इंसान को नुकसान का खतरा करीब 2,100 में 1 आंका गया है।
मुख्य बातें
- US Space Force के अनुमान के मुताबिक Swift की वापसी 4 नवंबर को होगी, अनुमान में करीब 11 घंटे का मार्जिन है।
- बचे हुए टुकड़े सिर्फ 20.6° उत्तर और 20.6° दक्षिण अक्षांश के बीच गिर सकते हैं।
- 2004 में सिर्फ 2 साल के मिशन के लिए भेजा गया Swift 20 साल से ज़्यादा चला।
- जुलाई 2026 में भेजा गया प्राइवेट ‘रेस्क्यू’ यान खराबी की वजह से इसे बचा नहीं पाया।
कब और कहां गिरेगा Swift?
NASA ने सोमवार को बताया कि US Space Force के ताज़ा अनुमान में Swift की री-एंट्री 4 नवंबर को अमेरिकी समय (EST) के हिसाब से तड़के करीब 3:30 बजे होगी। भारतीय समय में ये बुधवार दोपहर करीब 2 बजे बैठता है। लेकिन इस अनुमान में 11 घंटे आगे-पीछे का फर्क हो सकता है, यानी असल वक्त बुधवार तड़के से लेकर देर रात तक कभी भी हो सकता है।
अंतरिक्ष पर नज़र रखने वाली वेबसाइट EarthSky का अनुमान थोड़ा अलग है, जो 4 नवंबर 05:31 UTC (भारत में सुबह करीब 11 बजे) के आसपास का है, वो भी 12 घंटे के मार्जिन के साथ। ऐसे अनुमानों में फर्क आम बात है, क्योंकि आखिरी घंटों में सूरज की गतिविधि और हवा का घनत्व ऑर्बिट को तेज़ी से बदल देते हैं। EarthSky के मुताबिक हाल की सोलर एक्टिविटी ने ही Swift के गिरने की रफ्तार बढ़ाई है।
टुकड़े कहां गिरेंगे, ये वापसी के सही समय पर निर्भर करेगा। Swift का ऑर्बिट भूमध्य रेखा के काफी करीब है, इसलिए इसका मलबा सिर्फ 20.6° उत्तर से 20.6° दक्षिण अक्षांश की पट्टी में ही आ सकता है। इस पट्टी का बड़ा हिस्सा समुद्र है।
क्या भारत को कोई खतरा है?
यहां थोड़ा भूगोल काम आता है। 20.6° उत्तर अक्षांश मोटे तौर पर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा से होकर गुज़रता है। मुंबई (करीब 19° उत्तर), हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहर इस पट्टी के अंदर आते हैं, जबकि दिल्ली, लखनऊ, पटना और कोलकाता इससे बाहर हैं।
लेकिन ‘पट्टी के अंदर होना’ और ‘खतरे में होना’ दो अलग बातें हैं। NASA का 2,100 में 1 वाला आंकड़ा पूरी धरती पर किसी भी एक इंसान को चोट लगने की संभावना है, किसी खास शहर या व्यक्ति की नहीं। किसी एक आदमी के लिए ये संभावना इतनी कम है कि उसे गिनना भी मुश्किल है। EarthSky ने तो यहां तक लिखा है कि इससे ज़मीन पर किसी को खतरा नहीं होना चाहिए।
2 साल का मिशन, 22 साल की सर्विस
Swift को 2004 में गामा-रे बर्स्ट पकड़ने के लिए लॉन्च किया गया था। ये ब्रह्मांड के सबसे ताकतवर धमाके माने जाते हैं, जो कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक ही दिखते हैं। प्लान सिर्फ 2 साल का था, पर टेलीस्कोप करीब 11 गुना ज़्यादा समय तक चलता रहा।
इसकी खासियत थी रफ्तार। इसमें तीन टेलीस्कोप थे: गामा-रे धमाका ढूंढने वाला, उसके बाद की X-ray चमक ट्रैक करने वाला, और अल्ट्रावायलेट/ऑप्टिकल टेलीस्कोप जो सही लोकेशन और रंग बताता था। धमाका दिखते ही Swift उस तरफ घूमकर दुनिया भर की ऑब्ज़र्वेटरी को अलर्ट भेज देता था। NASA के मुताबिक इसकी खोजें सुपरनोवा, सक्रिय गैलेक्सी, तारों की X-ray चमक से लेकर हमारे सौरमंडल के धूमकेतु और एस्टेरॉयड तक फैली हैं। करीब 1,450 किलो वज़न वाला ये यान वैज्ञानिकों के लिए ‘कॉस्मिक अलार्म’ जैसा था।
बचाने की कोशिश क्यों फेल हुई?
Swift का ऑर्बिट सालों से धीरे-धीरे नीचे आ रहा था। उसे ऊपर धकेलने के लिए प्राइवेट कंपनी Katalyst Space का रोबोटिक यान LINK 3 जुलाई 2026 को भेजा गया था। EarthSky के मुताबिक करीब तीन हफ्ते बाद LINK के तीन में से दो रिएक्शन व्हील (यान की दिशा कंट्रोल करने वाले पुर्ज़े) खराब हो गए और वो बेकाबू होकर घूमने लगा। 19 अगस्त को NASA और Katalyst ने साफ कर दिया कि LINK अब Swift को पकड़कर ऊपर नहीं ले जा पाएगा।
अंतरिक्ष में किसी पुराने सैटेलाइट की ‘सर्विसिंग’ अभी नई तकनीक है। ये मिशन भले नाकाम रहा, पर इससे मिला डेटा आगे ऐसे रेस्क्यू मिशन को बेहतर बनाने में काम आएगा।
आपके लिए इसका मतलब
घबराने की कोई वजह नहीं है। अगर आप दक्षिण भारत या पश्चिमी तट पर हैं, तब भी किसी तरह की सावधानी की ज़रूरत नहीं बताई गई है। बस एक बात याद रखें: अगर कहीं आसमान से गिरा कोई अजीब धातु का टुकड़ा दिखे, तो उसे छुएं नहीं और स्थानीय प्रशासन को खबर करें। सोशल मीडिया पर ‘आसमान से आग का गोला’ वाले वीडियो आएं, तो उन्हें शेयर करने से पहले देख लें कि वो सच में Swift के हैं या पुराने क्लिप।
Tazanews की राय में असली कहानी डर की नहीं, बल्कि इस बात की है कि एक 2 साल वाला मिशन 22 साल तक विज्ञान की सेवा करता रहा। अंतरिक्ष में बढ़ते कचरे के दौर में ये भी याद दिलाता है कि हर सैटेलाइट की ‘रिटायरमेंट प्लानिंग’ कितनी ज़रूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
NASA का Swift टेलीस्कोप कब गिरेगा?
US Space Force के अनुमान के मुताबिक 4 नवंबर 2026 को, भारतीय समय से दोपहर करीब 2 बजे, लेकिन इसमें 11 घंटे आगे-पीछे का फर्क संभव है।
क्या Swift का मलबा भारत में गिर सकता है?
मलबा 20.6° उत्तर और दक्षिण अक्षांश के बीच कहीं भी आ सकता है, जिसमें दक्षिण भारत भी आता है। पर इस पट्टी का ज़्यादातर हिस्सा समुद्र है और किसी एक व्यक्ति के लिए खतरा बेहद कम है।
Swift Observatory क्या काम करता था?
ये गामा-रे बर्स्ट जैसे अंतरिक्ष के बड़े धमाकों को पकड़कर तुरंत दूसरी ऑब्ज़र्वेटरी को अलर्ट भेजता था, ताकि वैज्ञानिक उनका अध्ययन कर सकें।
स्रोत: NASA Science, EarthSky




