दिवाली में अब बस कुछ ही दिन बचे हैं और मिठाई की दुकानों पर भीड़ बढ़ने लगी है। इसी भीड़ में मिलावटी मिठाई और खोया सबसे आसानी से बिकता है, लेकिन कुछ आसान घरेलू जांच और एक छोटे से नियम की जानकारी से आप काफी हद तक खुद को बचा सकते हैं।
मुख्य बातें
- खोया या पनीर में स्टार्च की मिलावट आयोडीन की कुछ बूंदों से पकड़ी जा सकती है
- पानी में घोलकर हिलाने पर झाग बने, तो डिटर्जेंट का शक
- FSSAI के नियम के मुताबिक खुली मिठाई की ट्रे पर ‘बेस्ट बिफोर’ डेट लिखना ज़रूरी है
- घरेलू टेस्ट सिर्फ संकेत देते हैं, पक्की जांच लैब में ही होती है
त्योहार में मिलावट क्यों बढ़ जाती है?
सीधी सी बात है: दिवाली पर दूध, खोया और पनीर की मांग कई गुना बढ़ जाती है, पर सप्लाई उसी हिसाब से नहीं बढ़ती। यही गैप मिलावटखोरों के लिए मौका बन जाता है। खोया में स्टार्च या दूसरे सस्ते पदार्थ मिलाकर वज़न बढ़ाया जाता है, और दूध में पानी से लेकर डिटर्जेंट तक की मिलावट के मामले सामने आते रहे हैं।
अच्छी बात ये है कि इनमें से कुछ मिलावट घर पर बिना किसी मशीन के पकड़ी जा सकती है। आपको बस गर्म पानी, एक कांच का गिलास और केमिस्ट के यहां मिलने वाली आयोडीन सॉल्यूशन (टिंचर आयोडीन) की छोटी शीशी चाहिए।
घर पर करें ये 4 आसान जांच
1. खोया और पनीर में स्टार्च (आयोडीन टेस्ट): थोड़ा सा खोया गर्म पानी में घोलें या उबालकर ठंडा कर लें। अब इसमें आयोडीन की दो-तीन बूंदें डालें। अगर रंग नीला या नीला-काला हो जाए, तो स्टार्च मिलाया गया है। रंग न बदले, तो खोया संभवतः ठीक है। यही टेस्ट पनीर और दूध पर भी काम करता है।
2. डिटर्जेंट की जांच (शेक टेस्ट): मिठाई का छोटा टुकड़ा या दूध बराबर मात्रा में पानी के साथ एक बोतल में डालकर अच्छे से हिलाएं। अगर साबुन जैसा गाढ़ा झाग बने और टिका रहे, तो डिटर्जेंट का शक है। ऐसी चीज़ खाएं नहीं।
3. हथेली पर रगड़कर देखें: असली खोया हथेली पर रगड़ने से हल्का दानेदार लगता है, चिकनाई छोड़ता है और इसमें घी जैसी खुशबू आती है। नकली खोया अक्सर चिपचिपा पेस्ट जैसा या सूखा लगता है और इसमें खुशबू नहीं होती।
4. सूंघकर और चखकर: खट्टी या सड़ी हुई गंध, अजीब स्वाद, बहुत सख्त या चिपचिपी सतह बासी या खराब मिठाई के संकेत हैं। अच्छी मिठाई आमतौर पर नरम और एक जैसी होती है।
खुली मिठाई पर ‘बेस्ट बिफोर’ का नियम
बहुत से लोगों को नहीं पता कि दुकान पर खुली बिकने वाली मिठाई के लिए भी नियम है। FSSAI के आदेश के मुताबिक 1 अक्टूबर 2020 से खुली (बिना पैकिंग वाली) मिठाई की ट्रे या कंटेनर पर ‘बेस्ट बिफोर’ डेट दिखाना ज़रूरी है। मैन्युफैक्चरिंग डेट लिखना दुकानदार की मर्ज़ी पर है। बेस्ट बिफोर कितने दिन का होगा, ये दुकानदार मिठाई की किस्म और लोकल मौसम के हिसाब से तय करता है।
यानी अगली बार मिठाई लेते वक्त ट्रे पर लगी टैग ज़रूर देखें। डेट ना हो, तो दुकानदार से पूछने में कोई हिचक न करें। अगर आपको किसी दुकान पर खराब या मिलावटी मिठाई का शक हो, तो अपने इलाके के फूड सेफ्टी विभाग से शिकायत कर सकते हैं। हर राज्य में फूड सेफ्टी कमिश्नर इस नियम को लागू करवाने के लिए जिम्मेदार हैं।
आपके लिए इसका मतलब: स्मार्ट खरीदारी के टिप्स
- भरोसेमंद दुकान चुनें: जिस दुकान पर साल भर मिठाई लेते हैं, वही सबसे सुरक्षित विकल्प है। त्योहार के लिए अचानक खुले अस्थायी स्टॉल से सावधान रहें।
- बहुत सस्ते ऑफर पर शक करें: अगर खोया मिठाई बाज़ार से बहुत कम कीमत पर मिल रही है, तो सोचिए कि बचत कहां से आ रही है।
- ज़रूरत से ज़्यादा न खरीदें: खोया वाली मिठाई जल्दी खराब होती है। जितनी एक-दो दिन में खत्म हो सके, उतनी ही लें और फ्रिज में रखें।
- पैक्ड मिठाई पर लेबल पढ़ें: ब्रांड, FSSAI लाइसेंस नंबर और तारीख ज़रूर देखें।
- घर पर बनाना भी विकल्प: अच्छे दूध से घर पर बनी मिठाई पर सबसे ज़्यादा भरोसा किया जा सकता है।
Tazanews की राय ये है कि घरेलू टेस्ट काम के हैं, लेकिन इन्हें आखिरी फैसला न मानें। टेस्ट पास होने का मतलब ये नहीं कि मिठाई 100% शुद्ध है, और कुछ मिलावट सिर्फ लैब में ही पकड़ी जाती है। सबसे बड़ा बचाव सही दुकान और सीमित मात्रा में ताज़ी खरीदारी ही है।
(नोट: मिठाई खाने के बाद उल्टी, पेट दर्द या दस्त जैसी दिक्कत हो, तो घरेलू इलाज के भरोसे न रहें, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। आयोडीन सॉल्यूशन वाला सैंपल खाएं नहीं और इसे बच्चों से दूर रखें।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नकली खोया कैसे पहचानें?
थोड़ा खोया गर्म पानी में घोलकर ठंडा करें और आयोडीन की बूंदें डालें। नीला रंग आए तो स्टार्च की मिलावट है। हथेली पर रगड़ने पर असली खोया दानेदार और चिकना लगता है।
क्या खुली मिठाई पर एक्सपायरी डेट लिखना ज़रूरी है?
हां। FSSAI के नियम के मुताबिक 1 अक्टूबर 2020 से खुली मिठाई की ट्रे पर ‘बेस्ट बिफोर’ डेट दिखाना ज़रूरी है। मैन्युफैक्चरिंग डेट वैकल्पिक है।
क्या घरेलू टेस्ट पूरी तरह भरोसेमंद हैं?
नहीं, ये सिर्फ शुरुआती संकेत देते हैं। पक्की जांच के लिए सैंपल का लैब टेस्ट ज़रूरी है।
स्रोत: Food Safety Helpline, The Better India, S.S. Rana & Co.




