सर्दियों में प्रदूषण क्यों बढ़ता है, इसका सबसे बड़ा जवाब मौसम में छिपा है: ठंड के दिनों में ज़मीन के पास की ठंडी हवा के ऊपर गर्म हवा की एक परत बैठ जाती है, जो ढक्कन की तरह धुएं और धूल को नीचे ही रोक लेती है। यही वजह है कि अक्टूबर-नवंबर आते ही दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में AQI तेज़ी से ऊपर जाने लगता है, भले ही उस दिन गाड़ियां और फैक्ट्रियां उतनी ही चल रही हों।
मुख्य बातें
- टेम्परेचर इनवर्ज़न में गर्म हवा ठंडी हवा के ऊपर “ढक्कन” बना देती है
- हवा के फैलने की ऊंचाई (मिक्सिंग हाइट) गर्मियों के करीब 1 किमी से घटकर सर्दियों में कुछ सौ मीटर रह जाती है
- अक्टूबर-नवंबर में बारिश कम और हवा धीमी, इसलिए प्रदूषण बाहर नहीं निकल पाता
- हिमालय और अरावली के बीच का ‘कटोरे’ जैसा इलाका हालात और बिगाड़ता है
आसमान का ‘ढक्कन’: टेम्परेचर इनवर्ज़न क्या है?
आम दिनों में ज़मीन के पास की हवा गर्म होती है और ऊंचाई पर जाते-जाते ठंडी होती जाती है। गर्म हवा हल्की होती है, इसलिए वो ऊपर उठती है और अपने साथ धुआं-धूल भी ऊपर ले जाकर फैला देती है। यानी हवा लगातार ऊपर-नीचे घूमती रहती है और प्रदूषण पतला होता रहता है।
सर्दियों की रातों में ज़मीन जल्दी ठंडी हो जाती है, तो उसके ठीक ऊपर की हवा भी ठंडी हो जाती है। अब ऊपर गर्म हवा और नीचे ठंडी, भारी हवा। इसे टेम्परेचर इनवर्ज़न कहते हैं। University of Reading के रिसर्चर्स ने इसे “बर्तन पर रखे ढक्कन” जैसा बताया है। नीचे की हवा ऊपर उठ ही नहीं पाती और गाड़ियों, चूल्हों, कंस्ट्रक्शन और कचरा जलाने से निकला धुआं वहीं अटका रह जाता है। शहरों की कंक्रीट वाली सतह इस असर को और तेज़ कर देती है।
मिक्सिंग हाइट का गणित: छोटा कमरा, उतना ही धुआं
वैज्ञानिक उस ऊंचाई को मिक्सिंग हाइट कहते हैं, जहां तक प्रदूषण फैल सकता है। रिसर्च के मुताबिक दिल्ली में गर्मियों में ये करीब 1 किलोमीटर तक होती है, जबकि सर्दियों में घटकर कुछ सौ मीटर रह जाती है।
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए। मान लीजिए एक कमरे में उतनी ही अगरबत्तियां जल रही हैं, लेकिन कमरे की छत 1,000 मीटर से गिरकर 250 मीटर पर आ जाए। धुएं की मात्रा वही है, पर जगह चौथाई रह गई। मोटे तौर पर हवा में धुएं का घनत्व करीब चार गुना हो जाएगा। सर्दियों में हमारे शहरों के साथ भी कुछ ऐसा ही होता है। यही वजह है कि बिना किसी नए सोर्स के भी AQI एक-दो दिन में ‘खराब’ से ‘बहुत खराब’ हो जाता है।
धीमी हवा, कम बारिश और भूगोल का रोल
मानसून (जुलाई से सितंबर) में बारिश हवा को धो देती है। लेकिन अक्टूबर-नवंबर में बारिश लगभग नहीं होती और हवा की रफ्तार भी कम हो जाती है। तेज़ हवा प्रदूषण को उड़ाकर दूर ले जाती है, धीमी हवा में वो एक ही जगह मंडराता रहता है। दिसंबर से फरवरी की ठंडी और शांत रातें सबसे मुश्किल मानी जाती हैं।
भूगोल भी साथ नहीं देता। दिल्ली इंडो-गैंगेटिक मैदान में है, जिसके उत्तर में हिमालय और दक्षिण में अरावली है। ये एक तरह का कटोरा बना देते हैं। हिमालय उत्तर की ओर हवा को निकलने नहीं देता, इसलिए प्रदूषण उत्तर भारत के ऊपर से होते हुए बंगाल की खाड़ी की तरफ धीरे-धीरे खिसकता है। सर्दियों में बनने वाला कोहरा जब धुएं से मिलता है, तो वही धुंधली परत बनती है जिसे हम स्मॉग कहते हैं।
मौसम का असर कितना बड़ा है, इसकी मिसाल जनवरी 2025 है। रिसर्चर्स के मुताबिक 5 जनवरी को अच्छी हवा चलने से हालात सुधरे, लेकिन 15 जनवरी तक हवा धीमी और तापमान कम होने से प्रदूषण फिर बहुत तेज़ी से बढ़ गया, जबकि लोकल उत्सर्जन में अचानक कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ था। इसके ऊपर इसी मौसम में पटाखों और पराली जैसे मौसमी सोर्स भी जुड़ जाते हैं, और ठंड में हीटिंग के लिए ईंधन जलाना भी बढ़ जाता है।
सेहत पर असर और आप क्या कर सकते हैं
Duke Global Health Institute के प्रोफेसर Jim Zhang के मुताबिक प्रदूषित हवा फेफड़ों के साथ दिल और खून की नसों पर भी असर डालती है, जिससे स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है। बच्चे, बुज़ुर्ग और पहले से सांस या दिल की बीमारी वाले लोग सबसे ज़्यादा जोखिम में रहते हैं।
- सुबह की सैर का समय बदलें: इनवर्ज़न सबसे मज़बूत सुबह-सुबह और देर रात होता है। धूप निकलने के बाद हवा थोड़ी बेहतर मिक्स होती है।
- AQI ऐप देखकर निकलें: ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ दिन पर बाहर की कसरत टालें।
- घर के अंदर की हवा: बाहर AQI खराब हो तो खिड़कियां कम खोलें, और ज़रूरत हो तो HEPA फिल्टर वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करें।
- बाहर N95 मास्क: कपड़े का मास्क बारीक PM2.5 कणों से ज़्यादा नहीं बचाता।
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Tazanews की राय
सर्दियों का प्रदूषण सिर्फ ‘आज कितना धुआं निकला’ का मामला नहीं है, बल्कि ‘आज हवा उसे कितना फैला पा रही है’ का भी है। इसीलिए एक जैसे दिनों में भी AQI में बड़ा फर्क दिखता है। मौसम को हम नहीं बदल सकते, लेकिन इन महीनों में अपनी दिनचर्या ज़रूर बदल सकते हैं। मौसम विभाग और AQI के अपडेट पर नज़र रखें और कचरा या पत्ते जलाने जैसी छोटी आदतों से बचें, क्योंकि ठंड में उसका धुआं कहीं नहीं जाता।
(नोट: सांस, दिल की बीमारी या अस्थमा वाले लोग प्रदूषण के दिनों में अपनी दवा और सावधानियों के बारे में डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सर्दियों में प्रदूषण ज़्यादा क्यों होता है?
ठंड में टेम्परेचर इनवर्ज़न बनता है, मिक्सिंग हाइट घटती है और हवा धीमी हो जाती है। इससे धुआं और धूल ज़मीन के पास ही फंसे रहते हैं।
टेम्परेचर इनवर्ज़न क्या होता है?
जब ज़मीन के पास की हवा ठंडी और ऊपर की हवा गर्म हो, तो नीचे की हवा ऊपर नहीं उठ पाती। ये परत ढक्कन की तरह प्रदूषण को रोक लेती है।
दिन में किस समय हवा सबसे खराब होती है?
आमतौर पर देर रात और सुबह-सुबह, जब ज़मीन सबसे ठंडी होती है। दोपहर की धूप में हवा थोड़ी बेहतर तरीके से फैलती है।
स्रोत: University of Reading, Newslaundry, Duke Global Health Institute




