भारतीय मूल के NASA एस्ट्रोनॉट Anil Menon आज यानी 5 नवंबर को International Space Station (ISS) के बाहर एक हफ्ते में अपना दूसरा स्पेसवॉक करने वाले हैं। इस स्पेसवॉक में वे कनाडा के एस्ट्रोनॉट Joshua Kutryk के साथ स्टेशन पर आखिरी नया सोलर ऐरे लगाएंगे, जिसके बाद ISS की बिजली बनाने की क्षमता करीब 30% बढ़ जाने की उम्मीद है।
मुख्य बातें
- Anil Menon और Joshua Kutryk 5 नवंबर को ISS पर आठवां और आखिरी IROSA सोलर ऐरे लगाएंगे।
- 29 अक्टूबर को दोनों ने 7 घंटे 11 मिनट का स्पेसवॉक कर सातवां ऐरे लगाया था।
- काम पूरा होने पर स्टेशन की पावर करीब 160 kW से बढ़कर 215 kW तक पहुंच सकती है।
- भारतीय समय के हिसाब से स्पेसवॉक शाम को होगा, NASA इसे लाइव दिखाएगा।
आज का स्पेसवॉक: कब और क्या होगा
तय कार्यक्रम के अनुसार स्पेसवॉक अमेरिकी ईस्टर्न टाइम सुबह करीब 8 से 8:30 बजे के बीच शुरू होगा। भारत में उस वक्त शाम के करीब 6:40 से 7 बजे होंगे। NASA का लाइव कवरेज भारतीय समय से शाम करीब 5:15 बजे शुरू होना है। पूरा काम लगभग सात घंटे चलने का अनुमान है, यानी यह देर रात तक खिंच सकता है।
दोनों एस्ट्रोनॉट स्टेशन के दाहिनी तरफ (स्टारबोर्ड) वाले ट्रस यानी लंबे ढांचे पर 3B पावर चैनल के पास नया ऐरे फिट करेंगे। इसमें स्टेशन की रोबोटिक बांह Canadarm2 का बड़ा रोल है, जो एक एस्ट्रोनॉट के लिए खड़े होने का प्लेटफॉर्म बनती है। स्टेशन के अंदर से NASA एस्ट्रोनॉट Jessica Watkins और Luke Delaney उनकी मदद करेंगे।
IROSA क्या है और ISS को इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी
IROSA का पूरा नाम है ISS Roll-Out Solar Array। ये पैनल लॉन्च के वक्त एक सिलेंडर जैसे रोल में लिपटे रहते हैं और लगने के बाद खुद-ब-खुद चटाई की तरह खुल जाते हैं। इन्हें Redwire कंपनी ने Boeing के कॉन्ट्रैक्ट के तहत बनाया है। साइज़ में ये स्टेशन के पुराने मेन सोलर पैनल से लगभग आधे हैं, लेकिन हर एक करीब 28 kW अतिरिक्त बिजली दे सकता है।
ISS के पुराने पैनल 2000 के दशक से लगातार धूप और अंतरिक्ष के माहौल में हैं, इसलिए उनकी क्षमता धीरे-धीरे घटी है। पहला IROSA 2021 में लगा था और 2023 तक छह लग चुके थे। फिर तय हुआ कि दशक के आखिर में स्टेशन के रिटायर होने तक बिजली की मांग पूरी करने के लिए दो और चाहिए। ये आखिरी जोड़ी पिछले महीने SpaceX के 35वें कमर्शियल रीसप्लाई मिशन से स्टेशन पहुंची थी।
सीधा हिसाब: 30% ज़्यादा बिजली का मतलब
रिपोर्ट्स के मुताबिक सारे ऐरे लगने के बाद स्टेशन की बिजली करीब 160 kW से 215 kW हो जाएगी। यानी 55 kW का इज़ाफा, जो लगभग 34% बैठता है (NASA इसे “करीब 30%” बता रहा है)। समझने के लिए, भारत में एक आम घर का कनेक्शन 2 से 5 kW का होता है। इस हिसाब से ISS को जितनी एक्स्ट्रा बिजली मिलेगी, उतनी से धरती पर 10 से 25 आम घरों का लोड संभल सकता है।
स्टेशन पर यह बिजली लाइफ सपोर्ट सिस्टम, कंप्यूटर और सबसे बढ़कर साइंस एक्सपेरिमेंट्स में जाती है। ज़्यादा पावर का मतलब है एक साथ ज़्यादा प्रयोग, और पुराने पैनल फेल होने पर भी बैकअप।
कौन हैं Anil Menon: केरल से जुड़ी जड़ें
Anil Menon का जन्म 1976 में अमेरिका के मिनियापोलिस में हुआ। उनके पिता शंकरन मेनन केरल से अमेरिका गए थे, जबकि मां यूक्रेन से हैं। पेशे से वे इमरजेंसी मेडिसिन के डॉक्टर हैं और SpaceX के पहले फ्लाइट सर्जन रह चुके हैं। NASA ने उन्हें दिसंबर 2021 में एस्ट्रोनॉट चुना था।
जुलाई 2026 में वे Soyuz MS-29 से ISS पहुंचे और Expedition 74/75 का हिस्सा हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे करीब आठ महीने स्टेशन पर रहेंगे। उनकी पत्नी Anna Menon भी NASA की एस्ट्रोनॉट कैंडिडेट हैं और Polaris Dawn मिशन पर उड़ चुकी हैं। Kutryk के लिए भी यह खास मौका है, वे स्पेसवॉक करने वाले कनाडा के पांचवें एस्ट्रोनॉट बने हैं।
आपके लिए इसका मतलब
सीधे तौर पर आपकी ज़िंदगी पर असर नहीं, लेकिन ISS पर होने वाली रिसर्च दवाइयों, मटीरियल और पानी साफ करने की तकनीक तक पहुंचती है। स्पेस में दिलचस्पी रखने वाले छात्र आज शाम NASA+ या NASA के YouTube चैनल पर लाइव देख सकते हैं, सात घंटे का स्पेसवॉक असल में कितना मेहनत भरा होता है, यह देखना अपने आप में सबक है।
Tazanews की राय: स्पेसवॉक में देरी या बीच में बदलाव आम बात है। समय भारतीय घड़ी में बदला हुआ लगे तो NASA की ऑफिशियल अपडेट ही देखें, सोशल मीडिया के टाइम-टेबल पर भरोसा न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Anil Menon का स्पेसवॉक भारत में कितने बजे दिखेगा?
तय कार्यक्रम के मुताबिक NASA कवरेज भारतीय समय शाम करीब 5:15 बजे शुरू होगा और स्पेसवॉक शाम 6:40 से 7 बजे के आसपास शुरू होना है।
क्या Anil Menon भारतीय हैं?
वे अमेरिकी नागरिक हैं और अमेरिका में पैदा हुए, लेकिन उनके पिता केरल से हैं, इसलिए वे भारतीय मूल के एस्ट्रोनॉट हैं।
IROSA से ISS की बिजली कितनी बढ़ेगी?
NASA के मुताबिक आठों ऐरे लगने के बाद पावर करीब 160 kW से 215 kW तक पहुंचेगी, यानी लगभग 30% का इज़ाफा।
स्रोत: Starlust, FOX 13, Canadian Space Agency




